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Who am i ??

who am I ?? The Books, I have read, People, I have met, The People, whom I loved, The People, whom I lost, The beautiful people, behind my existence, The Memories, I have gained, The Fragrance, I have collected, The Fearlessness, I have witnessed The Courage, I have seen, The Friends, I have made, The Roads, I have traveled, Pain, Happiness, and Emotions, I have felt, The Perception, I have created, Nature, where I want to get lost, The Mountains, I have trekked, The Depths and heights, I have measured through my soaring and roaring in valleys, The Power, within myself, Letters of alphabets, Yessss! I'm, The Mix-up of all !!

तो यह थे दूधनाथ सिंह

काशीनाथ सिंह जी द्वारा संस्मरण जो हिंदुस्तान के संपादकीय पेज से लिया गया(प्रसिद्ध कथाकार) दूधनाथ मेरे लिए ही नहीं, समूचे हिंदी साहित्य के लिए लंबे अरसे से इलाहाबाद का आकर्षण था। वह आकर्षण आज खत्म हो गया। मैं दो महीने से पुडुचेरी में हूं। इलाहाबाद में नहीं हूूं। मुझ पर क्या गुजर रही है, मैं ही जानता हूं। मैं यहां बहुत दूर हूं, लेकिन मेरी आत्मा नई झूंसी इलाहाबाद में दूधनाथ की देह के आसपास है। मेरा अब यहां मन नहीं लग रहा है। मैं नवंबर में गुड़गांव में दूधनाथ के साथ था हफ्ते भर तक। उसने विदा होने से पहले मुस्कराते हुए गालिब का एक शेर कहा था- था जिंदगी में मर्ज का खटका लगा हुआ/ मरने से पेशतर भी मिरा रंग जर्द था। उससे 55 साल तक मेरा साथ रहा है। उसका इशारा शायद समय-समय पर होती रहने वाली उन बीमारियों की ओर था, जिनमें उसे मौत से जूझना पड़ा था, लेकिन जर्द को मैं उसके ठहाकों, हंंसी-ठट्ठों, उल्लास और छेड़छाड़ से जोड़ता हूं। तमाम संघर्षों के बीच वह एक जीवंत और जिंदादिल इंसान था। वह मेरा दोस्त, सहयात्री लेखक और रिश्ते में समधी था। वह हमारे सातवें दशक का सबसे तेज-तर्रार, सबसे प्...