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3...2...1....And Jump !!

बिफोर जम्प 

 जब मै बड़ा हो रहा था तो कुछ सपने पलने शुरू हो गए थे. उस समय दैनिक जागरण के साथ एक अतिरिक्त प्रति 'यात्रा' आनी शुरू हुई थी उसमें यायावर प्रजाति के लोगों के लिए कुछ ठीक ठाक सामग्री मिलती थी और मै उसे बहुत गहराई से और कल्पना सागर में गोता लगाते हुए पढ़ा करता था . ऐसे ही किसी दिन की प्रति में पोखरा और वहां के कुछ रोमांचक खेलों (बंजी जम्पिंग भी ) के बारें में विस्तृत वर्णन था और वही से बाल मन ने ठान लिया था की पोखरा (नेपाल ) घूमना है और दुस्साहसी रोमांचक खेलों को जरुर आजमाना हैं .फिर हाई स्कूल में सेकंड डिवीज़न आया और लगा की सारे सपने ख़तम लेकिन रोंडा ब्र्य्ने के THE SECRET सिद्धांत (आकर्षण का सिद्धांत ) ने अपना काम जारी रखा. परिस्थितियां बदलती रही और कुछ छोटे मोटे सपने भी इसी के साथ आकर्षण के सिद्धांत पर चलते हुए पूरी होती रहीं. पिछले वर्ष मैंने नवरात्रि के छुट्टियों में ही बंजी जम्पिंग और पोखरा भ्रमण की योजना बनाई. पर दुसरा देश और एक खतरनाक खेल के लिए मानसिक रूप से तैयार हुए बिना ही अपने चाचा के साथ नेपाल निकल  पड़ा. मोह- माया ने जकड़ा और मैं तार्किक रूप से खुद को ही जम्पिंग के लिए राजी नहीं कर सका और साथ में चाचा भी उसके एकदम खिलाफ थे. उसी पल मैंने सोच लिया था की अगले वर्ष इसी समय अपने मानसिक मजबूती पर काम करके यहीं आना है. फिर जब मैंने इन्टरनेट पर सर्च करना शुरू किया तो भारत में सबसे उंचा बंजी जम्पिंग प्लेटफार्म 83 मीटर (जम्पिंग हाइट्स, ऋषिकेश) है वहीँ पोखरा(नेपाल) का क्रेन वाला मात्र 70 मीटर   था. मेरा मन कुछ और एक्सट्रीम लेवल  चाहता था. फिर  मैंने " Highest bungy jumping platform in world" तो उपलब्ध विकल्प में से अभी  संभव केवल काठमांडू (नेपाल) से 3 घंटे के दुरी पर नेपाल -तिब्बत के सीमा पर "THE LAST RESORT" द्वारा जम्पिंग प्लेटफार्म (160 मीटर) ही लगा, जिसे न्यूजीलैंड के विशेषज्ञ संचालित करते हैं. अब डेस्टिनेशन तय करने के बाद मैंने सुरक्षा मानक के लिए पंजीकरण का पता किया फिर सोशल मचों से इसका रैंकिंग और रिव्यु देखा (CERTIFICATE OF EXCELLENCE and 4.5 star rating by TRIPADVISOR) फिर कन्फर्म किया. क्रू सदस्यों के  साथ   जगह के साथ भी फेमिलिअर होने के लिए मैंने यूट्युब से उसी स्थान के बंजी जम्पिंग क्लिप देखना शुरू किया ताकि भय ख़तम हो सके. जब मानसिक रूप से पूर्णत तैयार हो गया तब दूसरा काम ऑफिस से छुट्टी और घरवालों को मनाने का था. पहला आसान और दूसरा असंभव था तो मैंने पहले को   नैतिक रूप से किया और दुसरे में अनैतिक हो गया और घर पर बताया ही नही. 
                                                                            अब मैं 25 सितम्बर को रक्सौल के लिए पटना से निकल पड़ा और फिर अगले दिन रक्सौल से बीरगंज जाकर मनभावन घाटियों के रास्ते कुछ रोमांचक रास्तों से होकर शाम के 8 बजे तक काठमांडू पहुंचा और बहुत देर हो गयी थी फिर भी एक दिन बचाने के लिए मैंने अगले दिन (27 सितम्बर ) ही जम्प करने का सोचते हुए द लास्ट रिसोर्ट के सेल्स ऑफिस जाकर जम्पिंग चार्ज पेमेंट करके अगले दिन के लिए पंजीकरण के लिए काठमांडू के ट्रैफिक जाम में 4.5 किमी पैदल चलने का निर्णय लिया.मै काठमांडू के जगहों से अवगत भी नहीं था पर मैंने मोबाइल का जीपीएस ऑन किया तो बिना इन्टरनेट के भी काम कर रहा था उसी के भरोसे अपने आपको ट्रैक करके वहां पहुंचा पेमेंट किया और पास में ही एक सस्ता सा लॉज लिया और रात भर बस चैन की नींद लिया और सुबह 5:45 में रिपोर्टिंग टाइम पर काठमांडू सेल्स ऑफिस पहुंचा जहाँ से उनलोगों ने बाकियों के साथ मुझे भी बस में बैठाया और हिमालय के मनोरम वादियों, जिसमें लहराती नदियाँ और आसमान से गिरती हजारों झरने , हर 100 मीटर पर डरावने भूस्खलन के 3-4 घंटे के सफ़र के बाद हमारी बस अपने डेस्टिनेशन पर पहुंची. कूदने से पहले आधी जान तो हवा में अठखेलियाँ करती इस सस्पेंशन ब्रिज पर पहला कदम रखते ही निकल गयीं. 



फिर मैंने अपने दिल को मजबूत किया, और ब्रीफ़िंग को बेहद ध्यानपूर्वक सूना क्योंकि आपातकाल में उनसे ही मदद मिलती. ब्रिफर ने भी बेहद अच्छे से अपना काम किया हर एक बिंदु को जबतक समझाया तब तक की सब कुछ एकदम स्पष्ट ना हो गया. फिर सबका वजन लिया गया ताकि उसके आधार पर बंजी कोर्ड को सेट किया जा सके. मेरा वजन 76 KG था और 2 KG BUNJEE CHORD का वजन कुल मिलकर 78 KG. आज के समूह में सर्वाधिक वजन मेरा ही था. वजन की आधार पर दो समूह बनाए गया पहला समूह 69- 100 KG दूसरा 40-68 KG तक का . 

अब बारी जम्प कॉल की थी, पहले ब्रीफिंग की बाद ब्रिज पर जाने के लिए पहले समूह को एक स्थान पर बुलाया गया और ब्रिज पर जाने के लिए कहा गया उसी समय मेरा देहाती दिमाग सक्रिय होकर सबसे पिछे हो चला. इसलिए की जो आगे जाएगा उसे सबसे पहले जम्प करना होगा और अंत में अंतिम खड़े व्यक्ति को . लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था. पहले बारी बारी से पहले व्यक्ति से अंतिम तक को FULL BODY HARNESS और ANKLE HARNESS पहनाया गया. 

अब सब सेफ्टी इक्विपमेंट पहन लेने के बाद अब जम्प कॉल आने की बारी थी. दिल बड़ा शांत था की मेरी बारी तो अंतिम होगी पर अचानक ............................... किसी ने कहा..."Weight 78 kg Mr. Rajnish Singh come on Platform". सबसे पहला कॉल मेरा......मेरी तो आज जान पर बन आई. मैंने क्या - क्या प्लान किया था की मेरे से पहले 7 लोग जम्प करेंगे और फिर मैं उन्हें देखूंगा -समझूंगा की कैसे क्या वें करते हैं . पर यहाँ तो मेरा ही फतवा जारी हो गया😠. मैंने सोचा की चलो डरना क्या अब जो होगा देखा जायेगा ........ कुछ देर के लिए तो मन हुआ की माफ़ी मांगकर वापस हो जाऊं. पर फिर इतने दिन की मानसिक तैयारी विफल होती नजर आने लगी . इतना लम्बा सफर और कुछ समय का बलिदान देकर कमाए पैसे भी फ़ालतू हो जाते. लेकिन बात पैसों की नहीं थी बात थी बाकी चीज के लिए अपने कम होते आत्मविश्वाश की . कई दिनों से इसके वजह से कई महत्वपूर्ण चीजें पुरे ऊर्जा के साथ नहीं कर पा रहा था. कई महीनो से प्लानिंग विफल हो जाती थी उसका मानसिक तनाव लेना भी विफल हो रहा था . तब मैंने सोचा अधिक से अधिक मौत आएगी इससे बुरा तो कुछ हो ही नही   सकता तभी बंजी मास्टर ने कहा ," Rajnish just forget family, friends, success and failure and Jump and fly like birds......come on the edge of platform of bungy........Half feet on platform and another out of platform". 



अब जब मैं प्लेटफार्म के बाह्य किनारे पर आ रहा था तभी मेरा सोललेस शू 3-4 kg वजन के हर्नेस से अपने से नीचे फिसल रहा था जिससे मैं एक अच्छा जम्प नहीं कर पाता केवल फ्री फाल संभव था. उस समय मेरे मन में अचानक से सब डर छु मंतर हो गया था ..................... और उसका कारण था की मै एक्सट्रीम स्थिति के लिए तैयार हो गया था . तभी बंजी मास्टर ने कहा की ....... 3...2....1.....Big Jump. 


व्हाइल जम्प : 
Jump Date : 27 September 2017
Jump Time : 1:00 PM



ऐसा क्या चीज था जो मुझे यहाँ ले आया? क्या जम्प के बाद कोई टैग मिल जाता, प्रमाण पत्र मिल जाता ? नहीं . लेकिन फिर भी जीवन के छोटे छोटे भयों से व्यक्ति इतना घबराए रहता है की जीना मुश्किल हो जाता है , सीधे एक बड़े भय से सामना करके मै उन भयों पर अप्रत्यक्ष रूप से विजय पाना चाहता था. एक अदने से रबर कॉर्ड (रस्सी) के सहारे कूदने की तैयारी करते हुए मैं बार-बार अब भी यही सोचे जा रहा था क्यों हूं मैं यहां।
 इसके बाद हवा में 160 मीटर की ऊंचाई पर, पंजों के सहारे प्लेटफॉर्म पर टिकी और एड़ी वाला पिछला हिस्सा हवा में थामे मैंने आहिस्ता-से अपने जंप मास्टर द्वारा सहारे के लिए थामे हाथों को छुड़ा लिया। नीचे गहरी घाटी , अपने में मिला लेने के लिए तेज मचलती बिहार की शोक कोशी नदी, दोनों बगल में मजबूत चट्टानी पहाड़, उस पर बिखरी हरियाली से होते हुए मै नीचे घाटी में तेज बहती नदी में चला गया. फिर कब यह सभी विलुप्त होकर मेरे शांत-स्थिर मन में उतर गए, कब मेरी बांहें उसी अवस्था में खुल कर फैल गईं, मुझे नहीं पता. यही वह क्षण था, जिसमें मैं पूरी तरह से उपस्थित भी थी और लोप भी हो चुका था. किसी समाधि, किसी ध्यान जैसा वह एक क्षण! इसी अवस्था में जीते पलों में मैंने अपने आपको बादलों की गोद में बूंद-सी गिरती भारहीन, धरती की गोद में आहिस्ता से छोड़ दिया. यह सिर्फ उन पलों में सिमटा रह गया. उस लचीली रस्सी पर झटके खाते मैं अपने शरीर को हवा में मोड़ते, उछालते, घुमाते हुए नाच रहा था. यह सम्मोहन टूटा ऊपर प्लेटफॉर्म से लोग एंकल हार्नेश खोलने के लिए संकेत और आवाज दे रहे थे ताकि सिटिंग पोजीशन में आ पाऊं और प्लेटफार्म पर सेफ लैंडिंग हो सके. जब ऊपर खींचने वाली रस्सी आई तो मैंने रस्सी के हुक को अपने फुल बॉडी हर्नेस के हुक में फंसाया और ऊपर खिंच लेने का संकेत दिया. उसी समय मेरे एक मित्र और अपने माता-पिता का ख्याल आया जिनसे झूठ बोल कर मैंने ये सफ़र तय करने का साहस जुटाया था. उपर आने के बाद सभी क्रू-मैंबर्स मेरे अनुभव को जान कर बाकी लोगों का मनोबल बढ़ा रहे थे. ऊपर आने के बाद मैं उस नदी के किनारे पर उस जगह जाकर बैठा जहाँ से बाकी जम्पर को लाइव देख पाऊं और उनका उत्साहवर्धन कर सकूँ। फिर कुछ देर बाद सुन्दर तरीके से  बसाए रिसोर्ट के एक एकांत स्थान पर जाकर शांत! निशब्द! स्थिर! बैठ गया . यह रोमांच की छलांग नहीं, बल्कि हौसलों की उड़ान थी।

एक्सट्रीम एडवेंचर गेम्स THE LAST RESORT सिर्फ रोमांचक खेलों का गढ़ नहीं, एक बड़ी चुनौती है उस उबलते नौजवान-लापरवाह खून के लिए, जो महानगर की सड़कों पर बाइक दौड़ाते, जिग-जैक ड्राइविंग करके अपनी और दूसरों की जान खतरे में डालते हैं। बिना हेलमेट या सीट बेल्ट लगाए ड्राइविंग करने  वाले, ठीक हरी बत्ती पर लापरवाही से सड़क पार करने में ही साहस समझने वाले लोगों को चुनौती देता है। अगर दम-खम है तो जाइए, रोमांच की छलांग और हौसलों की उड़ान के लिए पहाड़ी क्षेत्र लिस्तीकोत, सिन्धुपाल्चोक  के THE LAST RESORT


HOW MUCH IT COST: 
THE LAST RESORT सार्क देशों के लोगों से बंजी जंप का चार्ज 5000 रुपए(लगभग) लेता है ।
साहस-आत्म विश्वास बढ़ाता है
अब तक यहां आने वाले सभी पर्यटकों के निजी अनुभवों को बांटने के बाद मैं यह  कह सकता हूं कि बंजी जंप के बाद धीरे-धीरे इन्होंने अपने व्यक्तित्व में एक खास तरह का परिवर्तन पाया। उनमें आत्म विश्वास, तुरंत निर्णय लेने की क्षमता, चुनौतियों को स्वीकार करने  का साहस बढ़ा है।

कब जाएं :
मानसून और बर्फबारी के समय को छोड़ कर यहां पूरे वर्ष जाया जा सकता है। यहां साप्ताहिक अवकाश सोमवार को होता है।
लोकेशन लिंक : 

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