Skip to main content

अहा !.......ये प्यारा जीवन


#A_Page_of_my_January_2018_Dairy

रात के 1 बज रहे हैं दुखों के बारे में, भविष्य के चुनौतियों के बारे में सोच रहे हैं और परेशान लग रहे थे. मन में आ रहा था की सब कुछ मैं छोड़ क्यूँ नहीं देता, जीवन में इतना लोड और तनाव लेने का क्या मतलब. लेकिन मेरे साथ ऐसा हमेशा होता हैं जब बहुत परेशान होता हूँ तभी अचानक बहुत खुश हो जाता हूँ.....थोडा अजीब हैं पर सच हैं. हमेशा मन में ये चलते रहता हैं की पता नहीं मैं ये फलां काम करूँ और सफलता ना मिले, कहने का मतलब परिणाम को लेकर हमेशा सशंकित रहते हैं और ये वाजिब भी हैं. लेकिन इस एक मात्र डर से अपने प्रयास में जो कमी आती हैं उससे घबराने लगते हैं. फिर लगता हैं की फेल होने के डर से कोशिश ना करने के ख्याल से, कोशिश करके फेल होने वाला रिस्क ज्यादा अच्छा हैं. कभी कभी भविष्य के चुनौतियों और भावनात्मक स्तर पर लड़ रहे युद्धों से डर लगता हैं लेकिन जब ये डर अपने चरम पर पहुँचता हैं तो माइल्ड स्टील के ब्रेकिंग पॉइंट के ग्राफ जैसे तुरंत डाउन फाल होता हैं. कहने का तात्पर्य ये है की जब बहुत सारी चुनौतियां दिखाई देती हैं तो ये फील होता हैं की हम उस काबिल हैं तभी तो चुनौतियां समझ में आ रही हैं, अगर कभी मन नहीं लगा तो परिस्थिति के अनुसार छोड़ दूंगा, लेकिन जब तक लगा हूँ पूरी ऊर्जा के साथ ही रहूँगा. या फिर कभी कभी मेरे तनाव तुरंत ऐसे कम होते हैं.........जब किसी बात को सोच के परेशान हो रहा हूँ तो तुरंत रोड पर चल रहे ट्राफिक को बाइक पर बैठे देखने के बजाय, हेलीकाप्टर पर बैठ के ट्राफिक देखने लगता हूँ और फिर तुरंत ट्राफिक समस्या का हल सामने होता हैं. यहाँ मैं ट्राफिक समस्या को अपनी कोई व्यक्तिगत समस्या और बाइक को अपने नजर की संकीर्णता और हेलीकाप्टर को दूर दृष्टि मान रहा हूँ. इस तरीके से समस्या फिर समस्या रह ही नहीं जाती, कई हल दिमाग में घुमने लग जाते हैं और कभी कभी हल नहीं भी मिलते तो समस्या सामान्य लगने लगती हैं. जब कभी ट्रेन से कहीं जा रहा होता हूँ तो खिड़की के तरफ चेहरा करके मैं घंटो बैठता हूँ, और प्रकृति के खूबसूरती और मानव के कंक्रीट के बेकार के जंगल के बीच से गुजरते हुए अपने बीते कल को सोचते रहता हूँ और हमेशा उसी बात को सोचकर ख़ुशी मिलती हैं जिस बात पर उस समय बहुत परेशान थे. कुछ कुछ जीवन अब समझ में आ रहा हैं बस हेलीकाप्टर पर चढ़ के ट्रैफिक देखने को आदत बना लेना हैं तो जीवन भविष्य के साथ साथ वर्तमान में भी एकदम खुशियों से भर जायेगी. हर एक परिस्थिति को जब समभाव से लेने की स्थिति आ जाएगी उस दिन मेरा जीवन सफल लगेगा.........लेकिन इससे एक डर भी लगता है की जीवन नीरस ना हो जाए. 

                                           ये मन अपने आप में कितना बड़ा गुरु हैं इसपर बहुत नाज होता हैं और भगवान् के क्रिएशन पर अचंभित भी होता हूँ. आज फिर बड़े दिन बाद अपने आप से प्यार करने का मन करने लगा हैं और मन करता है की कहीं भगवान् मिले और उनको बस गले से लगा कर ढेर सारा प्यार दूँ. इस प्यारी सी जीवन के लिए, जिसमें मुझे पूरी आजादी हैं की मुझे कुछ अच्छा लग सकता हैं, बुरा लग सकता हैं. रो सकता हूँ, खूब हंस सकता हूँ, दुनिया में कहीं भी घूम सकता हूँ, किसी प्रॉब्लम को सोल्व कर सकता हूँ, बहुत लोगों के चेहरों के मुस्कराहट का कारण बन सकता हूँ, हवा में उड़ सकता हूँ, पानी पर दौड़ सकता हूँ, किसी से टूट कर प्यार कर सकता हूँ, बेमिसाल इरादे पाल सकता हूँ, जो चाहे वो कर सकता हूँ और सबसे बड़ी बात जो चाहे कल्पना करके उसका सुख ले सकता हूँ, किसी के साथ पुरे जीवन ना जीकर एक पल में पूरी जिदंगी जी सकता हूँ और इस जीवन के इस असीम संभावनाओं से भरे होने के कारण ही इस जीवन से प्यार हैं. जीवन की सबसे प्यारी और खूबसूरती मुझे इसमें लगती हैं कल क्या होगा इसका पता ही नहीं, इतना रोमांच भला कहा मिलेगा......और इसके साथ हमेशा अपने आप को बदलते देखना भी बहुत सुखदायी होता हैं. .

Love You So Much My Dear God !!!!

Popular posts from this blog

यादों के झरोखों में...... मेरे पापा

मेरा AMIE और BA दोनों का EXAM चल रहा है इसलिए कल फादर्स डे के मौके पर कुछ लिख नही पाया पर आज मेरा EXAM ओवर हो गया तो सोचा आज लिखूंगा और अब लिख रहा हूँ...............                                          मेरे पापा शिक्षक होने के साथ साथ एक एक महान पापा है. मुझे ऐसा यकीन है की मेरे पापा मेरे लिए और पुरें परिवार के लिए कुछ भी कर सकते है और मैं भी उनके लिए और पूरे परिवार के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.  मुझे अपने पापा और माँ से जितना प्यार है शायद उतना किसी और से नही, पर मैं उन लोगों को इसका अहसास नही करा पाता पर मैं मानता हू की ये एक दूसरे से नहीं कही जाने वाली प्यार के तरह का ही प्यार है, जिसमें एक दूसरे का भौतिक रूप से मौजूदगी कोई मायने नही रखती. मुझे अपना गुजरा हुआ बचपन उतना याद नही आता हैं, पर जितनी भी यादें है उसमें से मेरे पापा-माँ के साथ बिताई यादें BEST हैं. मैं जब छोटा था तो ...

मैं मानुष हूँ या अमानुष

मैं मानुष हूँ या अमानुष, लोगों से डरता हूँ, भावनाओं से डरता हूँ, मिल के बिछड़ जाने से डरता हूँ, डरता हूँ किसी को खो देने से, मेरा अब तक का इतिहास रहा, जो दूर रहा, वो अपना रहा, जो पास रहा, वो दूर रहा, शायद मैं मानुष ना रहा, अभी तक प्रयास रहा, ना आ पाये कोई मेरे अंदर तक, ना समझा, ना समझने ही दिया, ना याद बना, ना बनने दिया, शायद मैं अमानुष ही रहा, जिनका केवल दीदार किया, वर्षों तक उनकी याद रहीं, जिनसे मैंने इकरार किया, उनकी यादें भी नहीं, मैं कौन हूँ जो मानुष भी नहीं, अमानुष भी नहीं, शायद इन दोनों के बीच एक उलझा सा पागल हूँ  । हाँ मैं पागल ही हूँ ☺️.....पगलेट कवि !!  Follow

3...2...1....And Jump !!

बिफोर जम्प   जब मै बड़ा हो रहा था तो कुछ सपने पलने शुरू हो गए थे. उस समय दैनिक जागरण के साथ एक अतिरिक्त प्रति  'यात्रा'  आनी शुरू हुई थी उसमें यायावर प्रजाति के लोगों के लिए कुछ ठीक ठाक सामग्री मिलती थी और मै उसे बहुत गहराई से और कल्पना सागर में गोता लगाते हुए पढ़ा करता था  .  ऐसे ही किसी दिन की प्रति में पोखरा और वहां के कुछ रोमांचक खेलों (बंजी जम्पिंग भी ) के बारें में विस्तृत वर्णन था और वही से बाल मन ने ठान लिया था की पोखरा (नेपाल ) घूमना है और दुस्साहसी रोमांचक खेलों को जरुर आजमाना हैं .फिर हाई स्कूल में सेकंड डिवीज़न आया और लगा की सारे सपने ख़तम लेकिन रोंडा ब्र्य्ने के THE SECRET सिद्धांत (आकर्षण का सिद्धांत )  ने अपना काम जारी रखा. परिस्थितियां बदलती रही और कुछ छोटे मोटे सपने भी इसी के साथ आकर्षण के सिद्धांत पर चलते हुए पूरी होती रहीं. पिछले वर्ष मैंने नवरात्रि के छुट्टियों में ही बंजी जम्पिंग और पोखरा भ्रमण की योजना बनाई. पर दुसरा देश और एक खतरनाक खेल के लिए मानसिक रूप से तैयार हुए बिना ही अपने चाचा के साथ नेपाल निकल  पड़ा. मोह- माया ने ज...