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A letter to IAS Aspirant by APARNA (AIR 108)

दोस्तो,
                     मैं बता नहीं सकती कि मुझे आपको यह बताते हुए कितनी खुशी हो रही है कि आप सब के सपोर्ट और वैल विशेज़ के चलते अंतत: मैंने इस वर्ष सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी हासिल कर ही ली। 108वीं रैंक रही मेरी।
दोस्तो, जिस तरह मुझसे पहले कामयाब हुए लोगों की कामयाबी से मुझे मदद मिली अपनी तैयारियों में, उसी तरह अब अगर मेरी कामयाबी से आगे कोशिश करने वालों को कुछ मदद मिल सके तो मैं खुद को एक तरह से ‘इनडेब्टेड’ महसूस करूँगी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर मैं यहाँ कुछ ऐसी बातें आपके साथ शेयर करना चाह रही हूँ जिन्होंने मेरी तैयारी और मेरी कामयाबी में बहुत योगदान किया है और शायद वे आपके लिए भी काम की साबित होंगी:

1. अपनी तैयारी अपने ढंग से कीजिए: बजाए इसके कि हम खुद को किसी और की स्ट्रेटजी के मुताबिक ढालने की कोशिश करें, हमें चाहिए कि हम परीक्षा की तैयारी का अपना खुद का तरीका ईजाद करें जो हमारी ज़रूरतों और हमारी स्ट्रेन्थ को मैच करता हो। केवल और केवल वही हमें सफ लता दिला पाएगा।

2.हर एक प्रश्र को हल करने की कोशिश होनी चाहिए: इस परीक्षा में 1 नंबर का अंतर भी बहुत बड़ा अंतर साबित हो सकता है। किसी भी प्रश्र को केवल इस आधार पर न दोड़ दें कि आपको वह ठीक से आता नहीं है;  जितना आता है उतना लिखें, कुछ न कुछ माक्र्स तो पा ही जाएँगे।

3. शुरू से ही अच्छी स्पीड मेन्टेन करें: अपने स्कूली दिनों से ही मेरी राइटिंग स्पीड बहुत अच्छी रही है, लेकिन तब भी सिविल सेवा परीक्षा में मेरी हालत यह थी कि बड़ी मुश्किल से आखिरी कुछ सेकण्ड्स में मैं पेपर पूरा कर पाती थी- और वह भी तब जबकि मैंने कभी किसी प्रश्र को 8 मिनट से ज्य़ादा नहीं दिया।
इसलिए आपको मेरी सलाह है कि पहले प्रश्र से ही अच्छी राइटिंग स्पीड मेन्टेन करें।

4.जितना हो सके उतना रिवाइज़ करें: पढ़े हुए को बार- बार रिवाइज़ करने से ज्य़ादा ज़रूरी और कुछ भी नहीं है, वरना आपकी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। कम पढ़ें पर अच्छा पढ़ें, और पढ़े हुए को जितना हो सके उतना रिवाइज़ करें।

5.आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस करें: केवल पढऩा ही काफ ी नहीं है, अनसॉल्व्ड पेपर्स में दिए प्रश्रों के उत्तर लिख-लिखकर प्रैक्टिस करें- बिल्कुल ऐसे जैसे परीक्षा हॉल में बैठकर लिख रहे हों।

6. ऑप्शनल पेपर के रूप में वही विषय चुनें जो दिल के करीब हो: इस बात को अच्छे से समझ लेना बहुत ज़रूरी है। कभी-कभी ऐसा होता है कि आपने जो विषय चुना है उसका पेपर दूसरे विषयों की तुलना में ज्य़ादा कठिन आ जाता है। तब आप यह सोचने लग जाते हैं कि कहीं मैंने यह विषय लेकर गलती तो नहीं कर दी। ऐसी स्थिति में केवल उस विषय के प्रति आपका सच्चा लगाव ही आपको भटकने से बचा सकता है। जैसे मैं अपनी बात करूँ तो मैंने हिस्ट्री को चुना था ऑप्शनल के रूप में। पर सन् 2012 और 2013 की परीक्षाओं में यह मेरे लिए बहुत ही कठिन साबित हुआ। बावजूद इसके मैंने एक बार भी अपने फै सले पर शक नहीं किया। क्यों? क्योंकि मुझे हिस्ट्री सचमुच पसंद है। और देख लीजिए, आज उसी की बदौलत मैं यहाँ तक आ गई हूँ।

7.आराम में कंजूसी न करें: भरपूर नींद लेना और अपने शरीर व दिलोदिमाग को ज़रूरी आराम देना भी उतना ही ज़रूरी है। सन् 2013 की परीक्षा में मेरा निबंध का पेपर बुरी तरह बिगड़ गया था। क्यों? क्योंकि पेपर से पहले वाली रात मैं बहुत कम सोई थी। इसका नुकसान यह हुआ कि एग्ज़ाम हॉल में मेरा दिमाग उतना अलर्ट नहीं रहा जितना कि होना चाहिए था। मैंने निबंध के लिए टॉपिक चुना ‘जीडीएच और जीडीपी’ और लिख डाला। पर एग्ज़ाम हॉल से निकलने के बाद मुझे अहसास हुआ कि मैंने कितना बड़ा ब्लंडर कर दिया था। मैंने समझा कि टॉपिक है- ‘जीडीएच एण्ड नॉट दि जीडीपी’, और इसीलिए मैं केवल ‘जीडीएच’ के बारे में ही लिखती रही! और इसका नतीजा यह हुआ कि उस साल केवल 3 माक्र्स से मैं मेन्स निकलने से रह गई!

8.विनम्रता कभी न छोड़ें: माना कि सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हम लोग एक आम नागरिक की तुलना में कहीं ज्य़ादा जानते हैं चीज़ों के बारे में, लेकिन भूलकर भी कभी इसका घमंड न लाएँ मन में। क्योंकि जैसे ही घमंड आएगा वैसे ही आपका सीखना रुक जाएगा। दूसरी तरफ , जैसे-जैसे आप विनम्र होते जाएँगे, वैसे-वैसे आपकी चेतना भी फैलती जाएगी, सीखने का आपका दायरा भी बढ़ता जाएगा और वैसे ही वैसे आपका व्यक्तित्व भी निखरता जाएगा। इसलिए जितने ज्य़ादा लोगों से और जितनी ज्य़ादा तरह के लोगों से मिल सकें मिलें, अपने बड़ों और अपने दोस्तों से जितना सीख सकें, सीखें। मैं जो आज कामयाब हुई हूँ तो इसका बहुत बड़ा श्रेय मेरी माँ की दी हुई सीखों को जाता है। कहने को तो वे जि़ंदगी भर हाउस वाइफ ही रहीं, पर नॉलेज और विज़डम के मामले में किसी भी वर्किंग वुमन से कम नहीं थीं। बेशक आज वे मेरे साथ नहीं हैं, पर मुझे हमेशा उनका हाथ अपने सर पे महसूस होता है। कभी मत भूलिएगा कि ये हमारे माता-पिता, हमारे शिक्षक, हमारे भाई-बहन और दोस्त-यार ही हैं जो हर मुश्किल घड़ी में हमें सहारा देते हैं। इनको छोटा समझने की गलती कभी न करें।

9. हमेशा पॉजि़टिव रहें: और सबसे आखिर में सबसे ज़रूरी बात। अगर आपको इस परीक्षा में कामयाब होना है तो शुरू से लेकर आखिर तक पॉजि़टिव एटीट्यूड रखना होगा। संघर्ष से मुँह न मोड़ें। जब तक उम्मीद की एक भी किरण दिख रही हो, कोशिश करते रहें। और याद रखें- अंधेरा सबसे घना तभी होता है जब पौ फ टने वाली हो। मैं यह बात अपने खुद के अनुभव से कह रही हूँ। मैंने देखा है कि अक्सर हम 99 पर आकर हार मानने लगतेे हैं। सन् 2012 के प्री एग्ज़ाम से 5 दिन पहले मैंने अपनी माँ को खो दिया था। पर फि र भी मैंने न केवल परीक्षा दी बल्कि क्लियर भी की- भले एग्ज़ाम हॉल में पेपर लिखने के दौरान एक पल के लिए भी मेरे आँसू नहीं रुक रहे थे और वहाँ मौजूद परीक्षक यह देख- देखकर हैरान हुए जा रहे थे। सन् 2014 का प्री एग्ज़ाम मैंने पीलिया से लड़ते हुए दिया। डॉक्टर कह रहे थे कि मुझे बिना देर किए अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए, पर मुझे तो परीक्षा देनी थी, सो मैं नहीं हुई। इसे आप अपने मुँह मियां मि_ू बनने की मेरी हिमाकत न समझें, मैं तो बस अपने खुद के अनुभवों का हवाला देकर आपको यह बताना चाह रही हूँ कि विल पावर और पॉज़ीटिव एटीट्यूड की क्या अहमियत है इस परीक्षा में।
मेरा सुझाव है कि पूरी तैयारी के दौरान आप ऐसी पॉजि़टिव कहानियाँ पढ़ते-सुनते रहें जिनमें बताया
गया हो कि किस तरह लोगों ने विल पावर और पॉज़ीटिव एटीट्यूड के बल पर मुश्किल से मुश्किल काम कर दिखाए हों। मैं खुद जब भी हारने लगती थी तो स्कूल में पढ़ी इस कविता को अपना सहारा बना लेती थी, जो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की लेखनी से निकली है। आप भी सुन लीजिए:

"वो प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर नहीं है,
थक कर बैठ गए क्या भाई! मंजि़ल दूर नहीं है।
अपनी हड्डी की मशाल से हृदय चीरते तम का,
सारी रात चले तुम दुख झेलते कुलिष निर्मम का।
एक खेप है शेष किसी विध पार उसे कर जाओ,
वो देखो उस पार चमकता है मंदिर प्रियतम का।
आकर इतना पास फि रे वो सच्चा शूर नहीं है,
थक कर बैठ गए क्या भाई! मंजि़ल दूर नहीं है।"

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