प्रसिद्ध अमेरिकी उद्योगपति और वैज्ञानिक इलोन मस्क ने 2013 में परिवहन के लिए एक क्रांतिकारी हाइपरलूप सिद्धांत पेश किया था। तब अनेक लोगों ने इस अजीबो-गरीब आविष्कार के बारे में शंकाएं प्रकट करते हुए इस टेक्नोलॉजी को खारिज कर दिया था, लेकिन अब लगता है कि यात्रियों को ध्वनि की गति से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की मस्क की योजना शीघ्र साकार हो सकती है। नए आविष्कार पर काम करने वाली अमेरिकी कंपनी, हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजिस या एचआइटी का कहना है कि वह अगले कुछ सप्ताहों के अंदर नई परिवहन प्रणाली के परीक्षण के लिए आठ किलोमीटर लंबे टेस्ट ट्रैक पर निर्माण कार्य शुरू कर देगी। हाइपरलूप में यात्रियों को 1200 किलोमीटर की रफ्तार से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की परिकल्पना गई है। मस्क ने दो वर्ष पूर्व इस क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी का खुलासा करते हुए बताया था कि नई परिवहन प्रणाली से लॉस एंजलिस और सेन फ्रांसिस्को के बीच 610 किलोमीटर की दूरी को सिर्फ 30 मिनट में तय किया जा सकता है, जबकि विमान से इस यात्र में इसका दुगना समय लगता है।
हाइपरलूप दरअसल एक विशाल लंबी ट्यूब है जिसमें से सारी हवा खींच ली जाती है। इससे ट्यूब में वैक्यूम बन जाता है। ट्यूब को मौसम के प्रभावों और भूकंप के झटकों से बचाने के लिए जमीन से ऊपर रखा जाता है। इस वैक्यूम ट्यूब में यात्रियों को कैप्सूलनुमा डिब्बों में बिठाया जाता है जिन्हें चुंबकों द्वारा गति प्रदान की जाती है। छह से आठ यात्रियों को लेकर ये कैप्सूल प्रत्येक 30 सेकेंड के अंतराल में रवाना होंगे। हाइपरलूप में एक तरफ की यात्र का टिकट करीब 20 डॉलर का होगा। लॉस एंजलिस से सेन फ्रांसिस्को के बीच लाइन बिछाने पर करीब 16 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान लगाया गया है। इस प्रोजेक्ट के आलोचकों ने इस लाइन पर 100 अरब डॉलर के व्यय का अनुमान लगाया है। कैलिफोर्निया मे इस समय एक हाईस्पीड रेल सिस्टम बनाने पर विचार चल रहा है जिस पर करीब 68 अरब डॉलर खर्च होंगे। हाइपरलूप कंपनी द्वारा के घाटी में बनाए जा रहे टेस्ट ट्रैक पर परीक्षण चरण में एक करोड़ लोग यात्र करेंगे, लेकिन यह एक बहुत लंबी प्रक्रिया है। ट्रैक के निर्माण के लिए 5000 एकड़ जमीन हासिल की गई है। ट्रैक के निर्माण में ढाई साल लग जाएंगे। परीक्षण के दौरान यात्रियों के कैप्सूल की गति सिर्फ 160 मील प्रति घंटे रहेगी, लेकिन कंपनी 1200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर कैप्सूलों का परीक्षण करने के लिए खाली कैप्सूल भी इस ट्रैक पर भेजेगी। मस्क टैक्सस में भी एक ट्रैक का निर्माण कर रहे हैं ताकि कंपनियां अपने अपने कैप्सूल के डिजाइनों का परीक्षण कर सकें। अमेरिका में भले ही हाइपरलूप टेक्नोलॉजी का परीक्षण होगा, लेकिन इस बात की संभावना बहुत कम है कि शुरू में खुद अमेरिकी लोग इस क्रांतिकारी परिवहन प्रणाली का लुत्फ उठा पाएंगे। हाइपरलूप के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ अन्य देश इस टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी ले रहे हैं ।
कंपनी का दावा है कि हाइपरलूप सिस्टम अन्य प्रणालियों से दस गुना बेहतर होगा। इनमें यात्री सुरक्षा उच्चस्तरीय होगी और कैप्सूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त होंगे। हाइपरलूप की गति के आगे जापान की बुलेट ट्रेनें फीकी पड़ जाएंगी। हाइपरलूप को लोकप्रिय बनाने के लिए इसके अधिकारी व्यस्त समय को छोड़कर कम भीड़ वाले समय में यात्रियों को नि:शुल्क सेवा देने पर विचार कर रहे हैं। कंपनी दूसरे साधनों से धन कमाने पर विचार करेगी और इसे लोकप्रिय बनाएगी।